Sunday, June 14, 2020

जान है तो जहाँ है

दिल धक है,दिल सन्न है
दिल हैरान हैं 
स्तब्ध है
निशब्द है
मन परेशान है
ये हो नहीं सकता
आत्महत्या जैसा कदम!
सुशाँत ने उठाया!
नहीं,नहीं 
ये हो नहीं सकता 
चमक दमक के पीछे अकेलापन 
मन का सूनापन
कहते हैं जिसे' डिप्रेशन '
उससे वो  रहा था जूझ
खो गया वो अपनी सूझ-बूझ
गया वो जीवन से हार
मौत को लगाया गले
पर क्यों ?आखिर क्यों?
क्यों फैल रहा है ये जहर युवाओं में?
क्यों बनता जा रहा है,महामारी?
ना जाने कितने सितारे 
खो जाते हैं,मिट जाते हैं
जिन्दगी से जाते हैं हार
क्यों?आखिर क्यों?
ये बन गया है इक सवाल
मचा रहा है मन में बवाल
क्या जीवन है इतना सस्ता ?
क्या खुश रहना है सिर्फ इक सपना  ?
क्यों आज का युवा 
छोटी सी हार को करता नहीं 
स्वीकार,आखिर क्यों?
क्यों भीतर से अशांत हैं
इन्सान ?
क्या हुआ जो टूट गया सपना?
क्या हुआ जो पूरे नहीं हुए अरमान?
कहीं तो चूक गये हैं हम
क्या सिर्फ success का ही देता है,हर कोई मूल मन्त्र ?
क्या  कोई बताता है,
हार पर कैसे करें प्रहार?
जीवन है बस एक किस्सा
हार को मानो उसका हिस्सा 
चाहे उथल-पुथल हो चारों ओर 
चाहे धुंधला हो,जीवन,प्रतीत
चाहे सपने जाएं टूट
गिर कर उठना ना छोड़ो 
क्या कभी सिखाया हमने?
क्या कभी बताया हमने -
जीवन नहीं फूलों की सेज
इसलिए काँटों  से नाता ना तोडो
अपनो से नाता जोड़ो
निराशा का दामन ना थामों
आशा से नाता जोड़ो
क्या सिखाया हमने
चाहे जीवन का सपना कभी ना हो पूरा
चाहे हमारा लक्ष्य रहे अधूरा
 आज नहीं तो कल
मिल जायेगा हल
बस एक बात रखो याद-
जीवन की कटने ना दो डोर
क्योंकि
जान है तो जहां है
जान है तो जहां है!  

Time to ponder for every parent
Where did we go wrong?
Time to introspect for every youth
Is material success everything?




7 comments:

  1. Very true...it's very sad that he chose this way

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  2. Beautifully given expression to feelings existing in most of the hearts at present.

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  3. Well expressed.
    When the going gets tough,
    The tough gets going.
    God help today's youth ��

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