कुछ दिन पहले लोग कहते थे
क्या हाल हो गए
सुरत-ए-बेहाल हो गए
Corona से नहीं
घर में कैद हो कर
बिमारों जैसे हाल हो गए
सड़कें ,बाग-बगीचे ही नहीं
हर घर के आंगन भी
वीरान हो गए
खिड़कियों से
ताकती हैं,झांकती हैं आंखें
पर मिलने से डरती हैं आंखें
बार-बार radio-T.V पर
मिलती है चेतावनी-
Corona से डरो ना
पर घर से बाहर निकलो ना
ये सुन सुन कर
डर के मारे हाल बेहाल हो गए
बच्चों का शोर हो गया गुम
पुलिस के siren आम हो गए
शादी, birthday हो या कोई और खुशी का मौका
बिन पार्टी के हर दिन आम हो गये
पहले थे traffic jam
अब तो traffic ही jam हो गये
पर अब लोग कहते हैं
आदत सी हो गयी है
अन्दर रहने की
कहीं cooking ,कहीं painting
कहीं दिन ,dancing के नाम हो गये
Webinars या zoom पे meeting के चरचे आम हो गये
Online classes ने जोड़ा
Teachers और बच्चों को
Work from home
बन गया जीने का तरीका
Corona से बचने के ये तरीके
आम हो गये
इतना ही नहीं,सीखा भी बहुत कुछ है हम ने
जान है तो जहां है
Tech savvy हैं
तो बहुत कुछ आसान है
समय बहुत बलवान है
मन्दिर,गुरुद्वारों या मस्जिद में नहीं
हम सब के भीतर ही भगवान है!
हम सब के भीतर ही भगवान है!
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