तजुर्बा
सोचा जिंदगी हसीन हो गयी
हम तो तजुर्बेकार हो गए
जब पलट के देखा ,तो पाया
हँसी, जैसे भूल हो गयी
कदम -कदम पे लगा
जैसे गुनेहगार हो गए।
कभी थे हम कमसिन
कभी थे मासूम
रोते भी थे, चिल्लाते भी थे
जब भी होते थे मज़लूम।
आज कोई दिल तोड़े
या करे जफ़ा
दस्तूरे जहाँ कहता है
होना नहीं खफ़ा।
रोना ना चिल्लाना
कहता है जहाँ
रोने -चिल्लाने से बढ़ती हैं दूरिआं
चुप रहना ही है हर मर्ज़ की दवा
चुप रहना ही है हर मर्ज़ की दवा।
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