आँखें
नियामत नहीं क़यामत होती हैं आँखें
आँखें हैं तो जीवन में उजिआरा है
ना हो तो चारों ओर अंधियारा है
कभी खुश होती हैं आँखें तो कभी होती हैं उदास
कभी होती हैं हैरान तो कभी होती हैं बदहवास
कभी सोई -सोई तो कभी जागती हैं आँखें
कभी जताती हैं नाराज़गी तो कभी प्रेम जताती हैं आँखें
जनाब ,आँखों -आँखों में हो जाती हैं बातें
आँखों -आँखों में कट जाती हैं रातें
कभी आँखों -आँखों में हो जाता है प्यार
तो कभी आँखों -आँखों में बढ़ जाती है तकरार
कोई आँखें तरेरता है
तो कोई आँखों से छेड़ता है
आँखें जो कोई दिखाए
बैरी जग सारा हो जाए
देख कर भी अनदेखा करती हैं आँखें
किसी की याद में तरसती हैं आँखें
आँखें मिलाने से हो जाती है मन की सगाई
आँखें चुराने वाले होते हैं हरजाई
जो आँखों का तारा होता है
वो सबसे प्यारा होता है
जाने कैसी -कैसी होती हैं ये आँखें
कभी छोटी तो कभी मोटी होती हैं आँखें
कभी चमकती तो कभी मटकती हैं आँखें
कभी नशीली तो कभी कटीली होती हैं आँखें
आँखों की रंगत होती है कैसी -कैसी
बालों सी काली ,सरसों सी पीली
हरियाली सी हरी ,आकाश सी नीली
भूरी आँखों वालों का विश्वास कभी ना करना
और कर लिया तो मुसीबत से क्या डरना
आँखें पढ़ना तो एक कला है यारो !
कौन चालाक, कौन भला है यारो !
जान जाता है वो, जो पढ़ लेता है आँखें
क्योंकि मन का आइना होती हैं आँखें
आँखें जीवन की ज्योति हैं
आँखें जैसे सीप में मोती हैं
आँखें प्रभु का सिमरन हैं
आँखें हैं तो जीवन है
आँखें हैं तो जीवन है।
No comments:
Post a Comment