EXPECTATIONS
ज़िंदगी में होती हैं expectations कभी -कभी
प्यार पाने की ,उम्मीद जगाने की
उदासी में ,बहलाने -फुसलाने की
ज़िंदगी में होती हैं expectations कभी -कभी
भाई ,बहन से रूठे तो वो उसे मनाए
दोस्तों में अनबन हो तो वो sorry कह जाएँ
sorry कह जाएँ तो बस बात बन जाए
मगर जब होता नहीं ये तो फिर .....
फिर बस ......... रह जाती हैं expectation कभी -कभी
रिश्ते तोड़ रहे हैं ,सीमाएँ लाँघ रहे हैं
modern होती दुनिया में ,हम हर दम भाग रहे हैं
भागते -भागते भी ना जाने क्यों होती है expectations कभी -कभी
हाँ -हाँ, हरदम लेने की ,पाने की
कुछ खो जाए तो मिल जाने की
होती है expectations कभी -कभी
पर यारो जब अपनी बारी आती है
तो हर कोई यह कह कर निकल जाता है -
आजकल ज़माना नहीं है expectations का
फिर भी ,फिर भी
क्यों रखते हैं expectations सभी ,कभी -कभी
यारो ,ज़िंदगी में क्यों होती हैं expectations कभी -कभी !
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